साहिब बंदगी के सद्गुरु साहिब जी ने आज अखनूर, जम्मू में अपने प्रवचनामृत से संगत को मंत्रमुग्ध किया
सब साहिब की नकल कर रहे हैं, पर साहिब का नाम गुम है।

साहिब बंदगी के सद्गुरु साहिब जी ने आज अखनूर, जम्मू में अपने प्रवचनामृत से संगत को मंत्रमुग्ध किया
साहिब बंदगी के सद्गुरु साहिब जी ने आज अखनूर, जम्मू में अपने प्रवचनामृत से संगत को मंत्रमुग्ध करते हुए कहा कि साहिब ने शब्द सुरति की बात कही। सब साहिब की नकल कर रहे हैं, पर साहिब का नाम गुम है। वो वाणी साहिब की ले रहे हैं, पर साहिब को आगे नहीं रख रहे हैं।
साहिब ने मन रूपी काल पर बहुत बोला। साहिब ने कहा कि जीव के संग मन रूपी काल रहता है, पर संसारी अज्ञानी लोग इस बात को नहीं जानते हैं। नाम से आपके सारे संशय मिट जाते हैं। नाना मत मतान्तर के लोग भी भटक रहे हैं, क्योंकि वो संतुष्ट नहीं हैं। पर सत्य नाम पाने के बाद आप संतुष्ट हैं। नाम की ताकत से संशय मिट जाता है। नाम की महिमा सबने कही है। आप सबका अध्ययन कर लेना। अंदर से कबीर साहिब निकल आयेंगे। पर वो साफ साफ साहिब का नाम नहीं लेते हैं। शब्द सारे साहिब के हैं।
साहिब जी ने आगे कहा कि बंधन से छुड़ाने वाला गुरु का नाम है। बिना नाम संसार का फेरा नहीं मिट सकता है। यहाँ दुनिया ने सोचा कि कोई भी नाम ले लो, कोई भी नाम जप लो। नहीं नहीं। यहाँ साहिब ने कहा कि करोड़ों नाम संसार में है, पर उनसे मुक्ति नहीं हो सकती है। वो गुप्त नाम है। वो केवल संत सद्गुरु के पास है। वो नाम कोई लिखने, पढ़ने वाली चीज नहीं है। वो जीवित वस्तु है, जो हमेशा शिष्य के साथ रहती है, उसे समझाती चलती है, पाप से बचाती चलती है और अंत में वही ताकत जीवात्मा को अपने साथ अमर लोक में ले जाती है।
कुछ लोग कहते हैं कि जो अंदर में धुनें हो रही हैं, वही सच्चा परमात्मा है। नहीं, साहिब ने इसे खंडित किया है। वो माया है। साहिब ने अपनी वाणी में साफ साफ कहा है कि जाप मर जाता है, अजपा भी मर जाता है, अनहद भी मर जाता है, पर वो शब्द जिसकी साहिब ने बात कही, वो अलग है, निराला है। वो अंदर में होने वाला शब्द नहीं हैं।
साहिब ने गुरु की महिमा कही। गुरुमुख होने की बात कही। नाम के बाद मेरा और आपका गुरु शिष्य का संबंध स्थापित हुआ। मेरे आपका संबंध नियमों पर हुआ। सत्य बोलना, माँस न खाना, शराब न पीना, पराई नारी की तरफ नहीं जाना, जुआ ना खेलना, हक की कमाई खाना, सत्य भक्ति करना। साहिब ने कहा कि गुरु का शब्द तोड़कर अगर कोई शिष्य जाता है तो उसे नरक में भी स्थान नहीं मिलता है। गुरु के शब्द में जब पूरा भरोसा हो जाए, तब काल का जाल कटता है।
साहिब जी ने आगे कहा कि जैसे पटकथा लिखी जाती है, फिर फिल्म बनती है। उसी के अनुसार कलाकारों को नियुक्त करते हैं। इसी तरह प्रारब्ध के अनुसार ही जीवन मिला है। जिनके बुरे कर्म होते हैं, उनकी बुद्धि भी कुंठित होती है।
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