परमात्मा कौन है ? किसको परमात्मा कहें ? आज हम बुद्ध, महावीर स्वामी, जीसस, गुरु नानक देव, साईं बाबा, मीराबाई, सहजोबाई, को क्यों कहते हैं परमात्मा?
परमात्मा कौन है ? किसको परमात्मा कहें ? आज हम बुद्ध, महावीर स्वामी, जीसस, गुरु नानक देव, साईं बाबा, मीराबाई, सहजोबाई, को क्यों कहते हैं परमात्मा?

परमात्मा कौन है ? किसको परमात्मा कहें ? आज हम बुद्ध, महावीर स्वामी, जीसस, गुरु नानक देव, साईं बाबा, मीराबाई, सहजोबाई, को क्यों कहते हैं परमात्मा?
जीवन की सच्चाई
परमात्मा कौन है ? किसको परमात्मा कहें ? आज हम बुद्ध, महावीर स्वामी, जीसस, गुरु नानक देव, साईं बाबा, मीराबाई, सहजोबाई, को क्यों कहते हैं परमात्मा? इसलिए क्योंकि इन्होंने अपने शरीर के अंदर उस चेतन-आत्मा को जाना; इन्होंने जान लिया कि संसार खेल है; ये मेरा ऑफिस, ये मेरा बेटा, ये मेरी माँ, ये मेरा पिता, ये मेरी पत्नी, ये मेरा पति, ये मेरे बच्चे, सब खेल है- मैं कुछ भी नहीं। सो सवाल उठा 'मैं कौन हूँ?' अगर परमात्मा चाहे तो उनको एक पल नहीं लगेगा और वो हमारी आवाज़ बंद कर सकते हैं, एक पल के अंदर शरीर को बिलकुल लाचार कर डालें, तब पानी भी पीने के लिए किसी को इशारा करना पड़ेगा। अभी अगर श्वास रुक गई तो क्या होगा ? इस शरीर को कोई घर में रखेगा नहीं एक दिन के लिए भी; बहुत चहेता हूँ मैं इनका, बहुत प्यारा हूँ पर कहेंगे 'जल्दी से उठाओ, जलाओ' । जब ये समझ आ जाए कि जीवन एक खेल है, तो शांति आ जाएगी ।तुम किसको 'मेरा' कहते हो? जिसको तुम 'मेरा' कहते हो वो एक दिन छूटने ही वाला है और जो छूटने वाला है वो तुम्हारा कैसे हो सकता है? जो कभी नहीं छूटता वो तुम्हारा है पर वो सिर्फ एक है जिसने तुम्हें यहाँ भेजा, वो ही वास्तव में पिता, माता, भाई, बहन, पति, पत्नी है, लेकिन उसको तुमने कभी जाना नहीं और वो कहीं और नहीं तुम्हारे अंदर ही गीत गा रहा है, तुम्हें अपने अंदर के गीत में खुद गुम हो जाना है और जब अपने गीत में गुम हुए तो नाची मीरा बीच बाजार, गाये गुरु नानक देव बीच बाजार; साईं बाबा बैठे बीच बाजार और भिक्षा मांगने में भी मस्ती आ गई । हम इन लोगों से सबक नहीं लेते, सिखावन नहीं लेते कि इन लोगों ने आखिर पाया क्या! तुम इनसे गाड़ी, बंगला, पैसा मांगते हो जो इनके पास था ही नहीं पर जो इन लोगों के पास था, तुम वो मांगते नहीं। कहते जरूर हो इन्हें "सच्चिदानंद" पर कभी माँगा उनसे वो आनंद जो चित्त में सत् प्रकट होने से आता है, ताकि तत् (परमात्मा) से मिलकर एक हो जाओ ताकि इस शरीर से छूटकर जहाँ पर वो मरकर शरीर के पार पहुँचे, वहाँ तुम भी पहुँच जाओ; उसी को 'पारब्रह्म लोक' कहा है । जैसे कहते हैं कि मैं भारत, दुबई, कुवैत, या अमेरिका में रहता हूँ, ऐसे ही वो भी एक लोक है, पारब्रह्म, जहाँ सब आत्माएँ जो परमात्मा हो गई, वो सब रहती हैं । तो तुम्हारे मनुष्य जीवन में अवसर आया है लेकिन तुम इसे कई जन्मों से चूक गए हो क्योंकि ज्ञान नहीं मिला और बिना ज्ञान के तो कुछ भी नहीं हो सकता है । तुमने स्कूल-कॉलेज में किताबें पढ़ी तभी तुम्हें कहीं नौकरी मिली । अगर तुम्हें मालूम होगा इस जीवन का मकसद क्या है, इस शरीर का उद्देश्य क्या है, अंदर की चेतना का उद्देश्य क्या है तभी तो तुम उस उद्देश्य को पूरा करने के लिए चलोगे; मैं आज मर जाऊँ तो क्या मुझे यहाँ बैठाएगा कोई ? क्या मेरे घर वाले मुझे घुसने देंगे ? वो तो शरीर को जला देंगे या दफना देंगे; पर उसके बाद क्या ? मृत्यु के बाद कौन सा जीवन है ? और मेरी जिंदगी का पता नहीं कि आज हूँ कल नहीं हूँ, कल क्या होगा ? जब किसी के अंदर जिज्ञासा उठती है इन सवालों का जवाब ढूंढ़ने के लिए तो उसके जीवन में सत्यगुरु प्रकट होता है और अपने अनुभव से पाया ब्रह्मज्ञान, यानि मुक्ति का ज्ञान, प्रदान करता है।
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