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साहिब बंदगी के सद्गुरु साहिब जी ने आज अखनूर, जम्मू में अपने प्रवचनों की अमृतवर्षा से संगत को निहाल किया

29 मार्च 2026
JK
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आत्मा का देश बहुत प्यारा है। उसे कोई नहीं जानता है। वो कहने सुनने से परे है।

साहिब बंदगी के सद्गुरु साहिब जी ने आज अखनूर, जम्मू में अपने प्रवचनों की अमृतवर्षा से संगत को निहाल किया

साहिब बंदगी के सद्गुरु साहिब जी ने आज अखनूर, जम्मू में अपने प्रवचनों की अमृतवर्षा से संगत को निहाल किया

साहिब बंदगी के सद्गुरु साहिब जी ने आज अखनूर, जम्मू में अपने प्रवचनों की अमृतवर्षा से संगत को निहाल करते हुए कहा कि आत्मा का देश बहुत प्यारा है। उसे कोई नहीं जानता है। वो कहने सुनने से परे है।


आपका ध्यान, आपकी सुरति 24 घंटे भटक रही है। यही आत्मा है। मन इसे एकाग्र नहीं होने दे रहा है। पूरा कमाल ही दुनिया में सुरति का है। यह सुरति दुनिया में उलझ गयी है। इस सुरति को दुनिया से हटाना है।

ध्यान किसका है। ध्यान आपका है। एकाग्र कौन करना चाह रहा है। आप। कौन है, जो आपके ध्यान को एकाग्र नहीं होने दे रहा है। इसको समझो। वो है मन। मन की तरंगों में ध्यान घूम रहा है। मन की सहायक इंद्रियाँ हैं।

साहिब जी ने कहा कि हम अंदर की दुनिया ध्यान से देखेंगे। जब ध्यान एकाग्र होगा, तब ऐसा हो पायेगा। हम तो इसे एकाग्र करना चाह रहे हैं। पर हो नहीं रहा है। इसका मतलब है कि कोई है, जो इसे एकाग्र नहीं होने दे रहा है। साहिब कह रहे हैं कि सुरति से वो देश देख सकते हो। सुरति में इतनी ताकत है कि आप इतनी दूर तक देख सकते हैं। आपका लक्ष्य मात्र एक है और वो है एकाग्र होना। जब सुरति एकाग्र हो जायेगा तो हम अपने को देख लेंगे। पलकें गिरी हुई हैं तो कुछ नहीं देख सकते हैं। पलकें खोल दीं तो दृश्य दिखेगा। साहिब ने एक शब्द में बड़ा प्यारा कहा। बोला कि अगर तन स्थिर हो जाए, मन भी स्थिर हो जाए, सुरति और निरति भी स्थिर हो जाए तो ऐसा जब एक पल आयेगा, उसकी तुलना कल्पांतर की साधना भी नहीं कर सकती हैं। यह बात मन जानता है कि अगर यह एकाग्र हो गया तो अपने को देख लेगा। इसलिए आपकी एकाग्रता में सबसे बड़ा बाधक मन है। वो क्यों ऐसा कर रहा है। आपसे पूरे काम करवा रहा है। आपसे चोरियाँ करवा रहा है, पाप कर्म करवा रहा है, दुनिया के काम करवा रहा है।

आप सोचो तो सही, जो मनुष्य पाप कर रहा है, क्या आत्मा पाप करेगी। क्या जो चोरी कर रहे हैं, बलात्कार कर रहे हैं, आत्मा करेगी। ये सब काम आत्मा के नहीं हैं। यह सब मन करवा रहा है। इसलिए मन ही अमर लोक की आत्मा को अपने जाल में फँसाकर रखे हुए है। इस जाल से केवल सद्गुरु छुड़ा सकते हैं। वो नाम की ताकत देकर आत्मा को निर्मल करके अपने देश में ले चलती है।




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प्रकाशित: 29 मार्च 2026
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