बसोहली में विशाल निरंकारी सत्संग का हुआ आयोजन
सतगुरु चाहता है अपनी नजर नियत ठीक करो प्रूफ करने की बजाय इम्प्रूव करो

बसोहली में विशाल निरंकारी सत्संग का हुआ आयोजन
बसोहली, (सुशील सिंह): बसोहली में सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज जी की असीम कृपा से एक विशाल सत्संग का भव्य आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में कठुआ, मांडली, बनी और पठानकोट सहित कई क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और सतगुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया। सत्संग का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ किया गया, जिसमें हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सत्संग की अध्यक्षता संत हरभजन सिंह चावला जी ने की। उन्होंने अपने प्रवचन में संगत को संबोधित करते हुए कहा कि सतगुरु का मुख्य संदेश यही है कि मनुष्य अपनी नजर और नियत को ठीक रखे। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग खुद को सही साबित करने में अधिक ध्यान देते हैं, जबकि असली जरूरत अपने जीवन में सुधार लाने की है। “प्रूफ करने की बजाय इम्प्रूव करना जरूरी है,” यह संदेश उन्होंने सरल शब्दों में संगत तक पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि जब इंसान अपनी सोच को सकारात्मक बनाता है और नीयत को साफ रखता है, तो उसका जीवन अपने आप बेहतर हो जाता है। सतगुरु का ज्ञान हमें जीवन की सच्चाई से परिचित कराता है और हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने संगत को समझाया कि दूसरों की कमियां निकालने के बजाय इंसान को अपने अंदर झांकना चाहिए और अपनी गलतियों को सुधारने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सतगुरु की शिक्षाओं को अपनाने से जीवन में शांति और संतुलन आता है। कई श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव भी साझा किए और कहा कि सत्संग से उन्हें मानसिक सुकून मिलता है और जीवन को सही दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि आज के तनाव भरे जीवन में ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रम बहुत जरूरी हैं, जो इंसान को अंदर से मजबूत बनाते हैं। संत हरभजन सिंह चावला जी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में थोड़ा-सा भी सुधार लाए, तो समाज में अपने आप सकारात्मक बदलाव आ सकता है। उन्होंने कहा कि सतगुरु हमें प्रेम, भाईचारा और मानवता का संदेश देते हैं, जिसे अपनाकर हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं।
उन्होंने संगत को यह भी प्रेरित किया कि वे सतगुरु के बताए मार्ग पर चलते हुए सादगी और सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति वही है, जो हमारे व्यवहार में दिखाई दे। केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी सतगुरु की शिक्षाओं को अपनाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में अरदास की गई, जिसमें समस्त मानवता की भलाई और विश्व शांति की कामना की गई।
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